नहीं पता कब आयेगी,मृत्यु इस आँगन में

मैं क्यूँ रूठा हूँ क्यूँ टूटा हूँ जीवन के इस पथ पर

कुछ खाली सा लगता है इन सूखे उपवन में

क्या खोया हैं क्या पाउँगा अब मै इस जीवन में

नहीं पता कब आयगी, मृत्यु इस आँगन में।

यही सोच कर बैठा हूँ एक दिन तू अपना लगी

जीवन के इस मझदार से मुझको पार लगा देगी

नहीं माँगता और कुछ भी इक बार तू आलिंगन कर ले

नहीं पता कब आयगी, मृत्यु इस आँगन में।।

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हकीकत

हकीकत ये नहीं की हम तुमसे पहले कभी मिले नहीं

हकीकत ये है की आज तुमसे दिल मिला है

हकीकत ये नहीं की तुम मेरी दुनिया हो

हकीकत ये है की तुम मेरी दुनिया में हो

हकीकत ये नहीं की तुम मेरी जुबां पर हो

हकीकत ये है की तुम मेरी डायरी के पन्नों पे हो

हकीकत ये नहीं की तुम चाँद सितारोँ में हो

हकीकत ये है की तुम मेरी आँसुओ में हो

हकीकत ये नहीं की तुम मेरी बाहों में हो

हकीकत ये है की तुम मेरी धड़कन में हो

हकीकत ये नहीं की तुमको याद करते है हम

हकीकत ये है की तुमको ना भूल पाएंगे हम।

प्रकृति श्रेष्ठ मानव निम्न

इस पृथ्वी की उत्पत्ति कैसे हुई है, यह एक रहस्य है और यह रहस्य सदैव रहस्य बना रहेगा। व्यक्ति विकास की प्रक्रिया में जितना पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहा है उससे कहीं ज्यादा स्वयं को।बढ़ते खोजें, अनुसंधान, भोगी जीवन मानव सभ्यता को गर्त में ले जा रहा है। बढ़ते वैश्विक तापन के कारण जल स्तर ऊपर उठ रहा है और एक दिन प्रत्येक चीजों का विनाश हो जायेगा और प्रकृति पुनः जन्म लेगी। इस प्रक्रिया को कोई न रोक सकता है न बदल सकता है।हम केवल प्रकृति के अंश हैं, पूर्ण नहीं। इसलिये हमे अपनी सीमाओं में रह कर आगे बढ़ना चाहिए। यह प्रकृति क्रमबद्ध एवम् खुबसूरत है। जो इसको बिगाड़ेगा पूरी मानव सभ्यता का विनाश कर देगा। लेकिन यह प्रकृति सदैव है और रहेगी।

*संघर्षो में नहीं विराम विजय पथ का करो तुम गान*

इक हार जीवन की हार नहीं होती
जो मिल गया अपनों का साथ तो वो हार बेकार नहीं होती

जो जीत गए तो जग तुम पर इतरायेगा
उस हार को भी जीत की राह बताएगा

*संघर्षो में नहीं विराम विजय पथ का करो तुम गान*

जीवन बहुत बड़ा है अपने निर्णय पर मत पछताना
बस उस निर्णय की खातिर तुम अपनी जान लगाना

पा जाने पर अपनी मंजिल तुम सबको दिखलाना
क्यों मिला है जीवन तुमको ये सबको समझाना

*संघर्षो में नहीं विराम विजय पथ का करो तुम गान*